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हॉस्पिटल्स का सन्देश, कोविड के दौरान जीवन शैली को दे प्राथमिकता : एक शोध
464060 लोगों ने हॉस्पिटल्स द्वारा इंस्टाग्राम पर किये गए स्वास्थ्य सम्बन्धी पोस्ट्स को पढ़ा
इंदौर. कोविड -19 के सन्दर्भ में हेल्थ कम्युनिकेशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर हाल ही में एक शोध किया गया, जिसमे भारत के चार विभिन्न छेत्रों से प्रमुख हॉस्पिटल्स , मेदांता, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल एवं चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, मणिपाल अस्पताल, और अपोलो अस्पताल के इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से उनके स्वास्थ सम्बन्धी संचार का अध्ययन किया गया । इस शोध के दौरान पाया गया कि अस्पतालों ने हमारी जीवनशैली के प्रति सजग रहने को, और उसे प्राथमिकता देने को कहा ।
इंदौर के प्रमुख प्रबंधन संस्थान ”प्रेस्टीज इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड रिसर्च” के मीडिया डिपार्टमेंट के विभाग प्रमुख डॉ राजू जॉन,फैकल्टी , प्रोफेसर इशिता दास ने डॉ. अनिल बाजपेयी, सीओओ,प्रेस्टीज एजुकेशन फाउंडेशन, के मार्गदर्शन में ये शोध किया गया। इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने दो महीने मार्च एवं अप्रैल की अवधि, में इन अस्पतालों द्वारा किये गए 513 स्वास्थ संचार इंस्टाग्राम पोस्ट्स का आकलन किया और पाया की सबसे ज्यादा संचार जिन काटेगोरिज़् में हुआ वो थे अस्पताल प्रबंधन द्वारा बातचीत जिसमे 129 पोस्ट्स एवं जीवन शैली जिसमे 121 पोस्ट्स किये गए थे ।
स्वास्थ्य संचार का एक अहम् रोल है जिसके द्वारा हमें अपने स्वास्थ्य स्थितियों को बदलने या सुधारने के लिए सशक्त बनाया जा सके । क्यूंकि कोरोना वायरस के वैक्सीन पर अभी कुछ निष्कर्ष नहीं आया है , इस कारण अस्पतालों द्वारा जीवन शैली के पहलुओं पर प्रभावी ढंग से पोस्ट किए जिससे की हम खुद को सुरक्षित और सशक्त कर सकें। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना, सही भोजन, व्यायाम, अच्छी नींद , मीडिया की अत्यधिक इस्तेमाल ना करना, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करना, नवजात शिशुओं का स्वस्थ , मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जानकारियां दीं ।
अन्य केटेगरी जिसमे अस्पताल प्रबंधन द्वारा इस कोविड काल में क्या बातचीत की गयी इस भी शोध किया गया । इसके अंतर्गत अस्पताल के डॉक्टर्स की टीम, प्रबंधन के लोगों ने कई पहलुओं पर बात कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया । जैसे भेदभाव और असमानताओं के मामले को सीमित करना, सामाजिक और शारीरिक दूरी के समय में मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर नियंत्रण रखना, जो कोविड पीड़ित स्वस्थ हो कर गए हैं उनका ध्यान रखना एवं उनका सहयोग करना, उनके द्वारा कोरोना वारियर्स की सुरक्षा एवं समर्थन को लेकर अपील भी की गयी, जिसका मुख्य कारण था देश के विभिन्न हिस्सों में कोरोना वारियर्स पर कुछ दुर्भाग्यपूर्ण हमले, अन्य रोगों से सम्बंधित मरीजों को काउंसलिंग भी दी गयी। प्रबंधन ने यह भी माना की इस नयी चुनौती का वे डट कर सामना कर रहे हैं।
हेल्थ बिलीफ मॉडल कम्युनिकेशन थ्योरी के तर्ज पर इस शोध में ऊपर दिए गए केटेगरी के अलावा इन केटेगरी में बांटा गया था जैसे तथ्यात्मक जानकारी,मिथक जानकारी, अन्य बीमारियों से संबंधित जानकारी , कोरोना वारियर्स, रोगियों की प्रतिक्रियाएं, मानसिक स्वास्थ्य, अस्पतालों द्वारा किए गए आइसोलेशन टिप्स / व्यवस्था ।
स्वास्थ्य संचार पर किए गए इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं को ये अहसास हुआ की अब हेल्थकेयर सेक्टर को सोशल मीडिया के माध्यम से कम्युनिकेशन पर निरंतर काम करना चाहिए । तथा सोशल मीडिया के संचार साधनों, जैसे वीडियो, ग्राफ़िक्स ,एनीमेशन आदि का अत्यधिक उपयोग भारतीय निजी एवं सरकारी स्वास्थ्य इकायों एवं अस्पतालों द्वारा निरंतर उपयोग में लाना चाहिए। इसका प्रमुख कारण है लोगों द्वारा स्वास्थ सम्बन्धी साधारण एवं विशेषज्ञ जानकारी प्राप्त करने के लिए इंटरनेट का अत्यधिक इस्तेमाल आज के समय में कर रहे हैं।
इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ सम्बन्धी कार्य करने वाले संस्थाएं एवं हेल्थ प्रॅक्टिवेर्स के लिए यह आवश्यक है की उनके द्वारा लोगों तक सही जानकारी पहुंचे और किसी भी प्रकार की गलत अवधारणाएं पर जानकारी स्पष्ट हो सके ।
हेल्थ प्रैक्टिशनर्स के लिए ये काफी जिम्मेदारी का काम है की उनके माध्यम से लोगों तक सही जानकारी पहुंचे और अवधारणाएं एवं गलत जानकारियां कम हो । स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल को भी चाहिए की वह अपनी स्वास्थ सम्बन्धी विशेषताएं, उनमे अर्जित सफलता का अनुपात, सर्जरी के बाद का जीवन, सकारात्मक पहलों को साझा करने और रोगी के प्रश्नों का जवाब देने के लिए इंटरनेट जैसे माध्यम का लगातार इस्तेमाल करें । इस तरह के डिजिटल मीडिया के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की बड़ी संख्या तक स्वस्थ सम्बन्धी जानकारियां पहुंचने में मददगार साबित हो सकता है ।
सभी स्वास्थ से जुडी निकायों के लिए डिजिटल प्लेटफार्म माध्यम स्वस्थ संचार के लिए बहुत उपयोगी बन सकता है। अभी भी बड़ी संख्या में भारत के अस्पताल सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स का उपयोग लोगों तक पहुंच बनाने की दिशा में कुछ हद तक पीछे हैं । कोविड के बाद स्वास्थ संगठनो का स्वास्थ संचार सोशल मीडिया पर कैसा होगा ये आने वाले दिनों में देखने की जरूरत है।


